राजधानी में कोरोना का संक्रमण लगातार कम होता जा रहा है। शनिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल डिजिटल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दिल्ली ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई को एक मुहिम बना दिया और हम सबने मिलकर तीसरी लहर पर भी काबू पा लिया। दिल्ली में नवंबर में एक दिन में 8,600 केस आए, लेकिन दिल्ली में अफरा-तफरी का माहौल नहीं था।
देश ही नहीं पूरी दुनिया के अंदर यह सबसे ज्यादा एक दिन में मामले थे। दिल्ली ने अच्छा प्रबंधन किया। आज यह घटकर 1133 हो गए हैं, जबकि ठीक होने की दर 96.5 फीसदी है। यदि दिल्ली में 100 लोग बीमार हुए तो 96.5 लोग ठीक हो चुके हैं। और बाकी लोगों का इलाज चल रहा है।
पॉजिटिविटी दर नवंबर माह 15 में थी, जो अब घटकर आज 1.3 पर आ गई। यह देश भर के मुकाबले काफी कम है। नवंबर के महीने में 1 दिन ऐसा था, जब दिल्ली में 45,000 सक्रिय मरीज हो गए थे। आज यह घटकर केवल 12 हजार के करीब रह गए हैं। 19 नवंबर को सबसे ज्यादा मौत 131 हुई थी, जो आज घटकर 37 हो गई।
अक्टूबर के अंत में आई थी तीसरी लहर
केजरीवाल ने बताया कि सबसे पहले जून के महीने में पहली बड़ी लहर आयी, जिसमें कोरोना के मामले बढ़ने लगे। साथ ही मौत का आंकड़ा बढ़ने लगा। दूसरी लहर अगस्त -सितंबर के आसपास आयी और तीसरी लहर दिल्ली के अंदर लगभग अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में आयी। जैसे-जैसे पराली का प्रदूषण बढ़ने लगा, वैसे ही कोरोना के मामले भी तेजी के साथ अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से बढ़ने लगे।
औसतन 90 हजार टेस्ट रोजाना हो रहे
केजरीवाल ने कहा कि हमने सबसे ज्यादा जोर जांच करने पर दिया है। 20 अगस्त तक हम 20 हजार के करीब टेस्ट रोजाना किया करते थे। आज दिल्ली के अंदर लगभग 90 हजार टेस्ट रोजाना हो रहे हैं। इतने टेस्ट भारत के अंदर तो सबसे ज्यादा हैं ही, पूरी दुनिया के अंदर भी सबसे ज्यादा टेस्ट दिल्ली के अंदर हो रहे हैं। केजरीवाल ने बताया कि दिल्ली में रोजाना 10 लाख की आबादी पर 4,500 टेस्ट हो रहे हैं।
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