सुप्रीम काेर्ट ने लॉकडाउन के दौरान मोरेटोरियम अवधि में कर्ज की स्थगित किस्ताें के ब्याज पर ब्याज न लेने की याचिका पर केंद्र सरकार से रुख स्पष्ट करने को कहा है। केंद्र ने बेंच काे बताया कि मोरेटोरियम अवधि के ब्याज व ब्याज पर ब्याज जैसे मसलों पर विचार करने के लिए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
समिति दो सप्ताह में निर्णय लेकर कोर्ट को जानकारी देगी। इस पर जस्टिस अशाेक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की बेंच ने कहा कि केंद्र ठोस नतीजों के साथ कोर्ट के समक्ष आए। तब तक उनका वह अंतरिम आदेश भी जारी रहेगा जिसमें उन्होंने कहा था कि मामला खत्म होने तक किसी भी कर्जदार का खाता एनपीए घोषित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे इस सुनवाई को अंतिम बार टाल रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। सुनवाई के बाद केंद्र सरकार ने मीडिया को बताया कि विशेषज्ञ समिति पूर्व सीएजी राजीव महर्षि के नेतृत्व में गठित की गई है।0
याचिकाकर्ता: बैंक कह रहे हैं खाते से 6 महीने का ब्याज काट रहे हैं, माेरेटाेरियम बढ़ाया जाए
वरिष्ठ वकील सीए सुंदरम ने कहा कि मोरेटोरियम की अवधि 2 सप्ताह बढ़ा देना चाहिए क्योंकि बैंक अब कह रहे हैं कि मोरेटोरियम अवधि खत्म हाे चुकी है। आपकी देनदारी शुरू हो गई है। आपके खाते से 6 महीने के ब्याज को डेबिट किया जा रहा है।
बैंक: सारी देनदारी हम पर नहीं डाली जा सकती है...आखिर नुकसान कौन उठाएगा?
बैंकाें की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि लॉकडाउन खत्म हो चुका है, नुकसान कौन उठाएगा? सारी देनदारी बैंकों पर नहीं डाली जा सकती। बिजली क्षेत्र के ऋण पर राज्यों को फैसला लेना है। आरबीआई के वकील वी गिरी ने कहा कि 27 मार्च के परिपत्र के अनुसार डाउनग्रेडिंग नियमों के अनुसार हाेगी। 2 सप्ताह की देरी से करदाताओं पर असर नहीं पड़ेगा।
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