महादेव को समर्पित सावन मास सोमवार से शुरु हो गया है। सावन माह के पहले सोमवार को जहां श्रद्धालुओं ने व्रत रखा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की अपने घरों में ही आराधना की। कोरोना वायरस के कारण जिले के सभी मंदिर, धार्मिक स्थल, शिवालय व आश्रम बंद हैं। श्रद्धालुओं ने अपने घरों में ही भगवान शिव की आराधना की। उन्होंने जहां शिव पुराण पढ़ा, वहीं शिव गायत्री का जाप भी किया।
घरों में ही श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की प्रतिमा पर जलाभिषेक भी काले तिल व दूध के साथ किया। ज्योतिषाचार्य पंडित डा. गौरव भारद्वाज का कहना है कि सावन का माह भगवान शिव को समर्पित है। धर्म के अनुसार पूजा का तीसरा क्रम भी भगवान शिव ही हैं। शिव ही अकेले ऐसे देव हैं, जो साकार और निराकार दोनों ही हैं। भगवान शिव रुद्र हैं। उनसे ही परिवार, विवाह, संस्कार, गौत्र, पितृत्व, मातृत्व, पुत्रत्व आदि अनेक परंपराओं की नींव पड़ी।
उनका कहना है कि सुयोग्य वर की अभिलाषा में युवतियां भी सावन मास के सोमवारों का व्रत रखती हैं। बहुत सी युवतियां तो पूरे सावन मास का ही व्रत रख कर भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं, ताकि उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति हो सके। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि कोरोना के कारण धार्मिक स्थल बंद हैं, इसलिए सभी अपने घरों में ही भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा-अर्चना नियमित रुप से करें।
फिरोजपुर झिरका में खुले प्राचीन झिर मंदिर के पट
फिरोजपुर झिरका| लोगों की आस्था को देखते हुए सावन के पहले सोमवार को झिर मंदिर के पट खोल दिए गए ताकि लोग आसानी से झिरकेश्वर भगवान के दर्शन कर सकें। जबकि कुछ दिन पहले झिर मंदिर के प्रधान अनिल गोयल ने इस महामारी को देखते हुए पूरे सावन झिर मंदिर के द्वार खोलने से मना कर दिया था। ताकि कोई भी भक्तजन भगवान शिव के दर्शन करने आए तो भीड़ की वजह से कोविड-19 के संक्रमण के चपेट में ना सके।
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