गांव की महिलाओं ने बनाए एक लाख मास्क, 10 लाख रुपए किए एकत्रित https://ift.tt/3gdMDsk

लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लगातार हाथ धोना और मास्क पहनना अनिवार्य है। इसके चलते शक्ति फाउंडेशन ने सूरत, तापी और नवसारी जिले में रहने वाली ग्रामीण महिलाओं को कॉटन का मास्क घर से बनाने का काम देना शुरू किया। 9 साल से दक्षिण गुजरात में आदिवासी महिलाओं के साथ काम करने वाली शक्ति फाउंडेशन और उसकी संस्थापक डॉक्टर सोनल रोचानी ने इन इलाकों में महिलाओं को मास्क बनाने का काम दिया, इसका उद्देश्य लॉकडाउन में भी महिलाओं काे आत्मनिर्भर बनाना है। चलथाण, पलसाणा, मरोली, सामामापोर आदि गांवों में 300 से अधिक सखी मंडल की महिलाओं को इस तरह से काम की शुरुआत करवाई गई। मात्र 10 रुपए में डबल लेयर कॉटन मास्क, जिसे धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सके, बनाया जा रहा है।

इसे अलग अलग कॉरपोरेट कंपनियों, सोसाइटियों अाैर हॉस्पिटल में देना शुरू किया गया। ओएनजीसी में भी महिलाओं द्वारा बनाए गए मास्क पसंद किए गए, जिसके बाद 60000 मास्क बनाने का ऑर्डर इन महिलाओं को दिया गया। अब तक एक लाख से ज्यादा मास्क बनाकर ग्रामीण की महिलाओं ने 1 लाख रुपए अपने स्वरोजगार से इकट्ठा किया है। शक्ति फाउंडेशन की सह संस्थापक डॉक्टर सोनल रोचानी ने बताया कि जब से लॉकडाउन लागू हुआ तब से कई जगहों पर मास्क नहीं मिल रहे थे। एन95 जैसे मास्क हर कोई इस्तेमाल नहीं कर सकता। वहीं एक बार इस्तेमाल कर फेंक देने वाले सर्जिकल मास्क के बदले कॉटन के वॉशेबल और रीयूजेबल मास्क बनाने की शुरुआत की गई।



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Village women made one lakh masks, collected 10 lakh rupees


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